हनुमान जी की आरती
अवधि: 4-5 मिनट
॥ आरती ॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥ आरती कीजै...
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ आरती कीजै...
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥ आरती कीजै...
पैठि पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाईं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥ आरती कीजै...
सुर नर मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥ आरती कीजै...
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसि बैकुण्ठ परम पद पावै॥
लंक विध्वंस किए रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
गोस्वामी तुलसीदास रचित
इस आरती की ऑडियो रिकॉर्डिंग ऐप में नहीं है। यह पाठ कार्यपुस्तिका संस्करण से लिया गया है और धार्मिक अनुमोदन हेतु लंबित है।
॥ जय आरती ॥
हनुमान जी की आरती
॥ आरती ॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥ आरती कीजै...
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ आरती कीजै...
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥ आरती कीजै...
पैठि पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाईं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥ आरती कीजै...
सुर नर मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥ आरती कीजै...
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसि बैकुण्ठ परम पद पावै॥
लंक विध्वंस किए रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
गोस्वामी तुलसीदास रचित
इस आरती की ऑडियो रिकॉर्डिंग ऐप में नहीं है। यह पाठ कार्यपुस्तिका संस्करण से लिया गया है और धार्मिक अनुमोदन हेतु लंबित है।