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सत्यनारायण जी की आरती

अवधि: 4-5 मिनट

॥ आरती ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जनपातक हरणा॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ रत्नजड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे। नारद करत निराजन, घण्टा ध्वनि बाजे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दर्श दियो। बूढ़ा ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी। चन्द्रचूड़ एक राजा, तिनकी बिपति हरी॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्हीं। सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति कीन्हीं॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ भाव-भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धर्‌यो। श्रद्धा धारण कीन्हीं, तिनको काज सर्‌यो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ ग्वाल-बाल संग राजा, बन में भक्ति करी। मनवांछित फल दीन्हों, दीनदयाल हरि॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ चढ़त प्रसाद सवाया, कदली फल मेवा। धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत्यदेवा॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ श्री सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

शिवानन्द स्वामी रचित; सत्यनारायण कथा व पूजा की आरती

इस आरती की ऑडियो रिकॉर्डिंग ऐप में नहीं है। यह पाठ कार्यपुस्तिका संस्करण से लिया गया है और धार्मिक अनुमोदन हेतु लंबित है।

॥ जय आरती ॥

सत्यनारायण जी की आरती

॥ आरती ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जनपातक हरणा॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ रत्नजड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे। नारद करत निराजन, घण्टा ध्वनि बाजे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दर्श दियो। बूढ़ा ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी। चन्द्रचूड़ एक राजा, तिनकी बिपति हरी॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्हीं। सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति कीन्हीं॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ भाव-भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धर्‌यो। श्रद्धा धारण कीन्हीं, तिनको काज सर्‌यो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ ग्वाल-बाल संग राजा, बन में भक्ति करी। मनवांछित फल दीन्हों, दीनदयाल हरि॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ चढ़त प्रसाद सवाया, कदली फल मेवा। धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत्यदेवा॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥ श्री सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

शिवानन्द स्वामी रचित; सत्यनारायण कथा व पूजा की आरती

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