श्री राम स्तुति
अवधि: 3-4 मिनट
॥ आरती ॥
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं।
नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुख कर कञ्ज पद कञ्जारुणं॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि नवनील नीरद सुन्दरं।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द्र दशरथ नन्दनं॥
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर सङ्ग्राम जित खरदूषणं॥
इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मन रञ्जनं।
मम हृदय कञ्ज निवास कुरु कामादि खल दल गञ्जनं॥
गोस्वामी तुलसीदास (विनय पत्रिका); राम नवमी/रामायण पाठ में आरती-स्तुति रूप में प्रचलित
इस आरती की ऑडियो रिकॉर्डिंग ऐप में नहीं है। यह पाठ कार्यपुस्तिका संस्करण से लिया गया है और धार्मिक अनुमोदन हेतु लंबित है।
॥ जय आरती ॥
श्री राम स्तुति
॥ आरती ॥
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं।
नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुख कर कञ्ज पद कञ्जारुणं॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि नवनील नीरद सुन्दरं।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द्र दशरथ नन्दनं॥
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर सङ्ग्राम जित खरदूषणं॥
इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मन रञ्जनं।
मम हृदय कञ्ज निवास कुरु कामादि खल दल गञ्जनं॥
गोस्वामी तुलसीदास (विनय पत्रिका); राम नवमी/रामायण पाठ में आरती-स्तुति रूप में प्रचलित
इस आरती की ऑडियो रिकॉर्डिंग ऐप में नहीं है। यह पाठ कार्यपुस्तिका संस्करण से लिया गया है और धार्मिक अनुमोदन हेतु लंबित है।